देश में वर्ष 2025 की बारिश ने इस मानसून सीजन में पिछले 49 वर्षों की औसत वर्षा का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य-दक्षिण भारत तक नदियाँ और बांध उफान पर हैं। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक, बाढ़ और जलभराव ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। देश के 32 राज्यों में औसत वर्षा का कोटा जुलाई माह में ही पूरा हो गया। अगस्त माह में मानसून का अतिरिक्त पानी बरस रहा है।वर्ष 1971 से 2020 तक, यानी 49 वर्षों में, मानसून सीजन (1 जून से 30 अगस्त - तीन महीने) में देश में औसत वर्षा 679.5 मिमी हुई। वर्ष 2025 में, इस सीजन के 28 अगस्त तक 717.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। यानी देश में 38.2 मिमी (5.5 प्रतिशत) अधिक वर्षा हुई। इस मौसम में देश में 40 दिनों तक, यानी हर दूसरे-तीसरे दिन, बादलों ने औसत से ज़्यादा बारिश की।
16 राज्य बाढ़ से प्रभावित-
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, नई दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार बाढ़ से प्रभावित हैं। इन राज्यों में बारिश के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। अत्यधिक बारिश के कारण देश भर के बांध और जलाशय लबालब होकर खुशियाँ ला रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर जान-माल के नुकसान के साथ-साथ कई तरह से भारी तबाही भी हुई है। 2013 में केदारनाथ में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद, मानसून आक्रामक हो गया और उत्तर भारत में कहर बरपाते हुए 12 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। आईएमडी के अनुसार, इस मौसम में उत्तर भारत में सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक बारिश हुई और 21 बार अत्यधिक भारी बारिश हुई।
मानसून ऋतु में वर्षा: औसत से तुलना
- 1 राज्य (लद्दाख) में अत्यधिक वर्षा।
-8 राज्यों में अधिक बारिश
-23 राज्यों में सामान्य बारिश
-4 राज्यों में कम बारिश
प्रमुख राज्यों में वर्षा की स्थिति
राज्य--- औसत वर्षा (1971-2020)-- वर्षा (2025)--- औसत से अधिक प्रतिशत
राजस्थान- 361.3-- 564.8---56 प्रतिशत
मध्य प्रदेश- 750.9---919.8---22 प्रतिशत
गुजरात--569.2--644.9---13 प्रतिशत
नई दिल्ली-426.2---589.3---38 प्रतिशत
महाराष्ट्र- --788.6--838.8---6 प्रतिशत
जम्मू और कश्मीर-441.6---552.3---25 प्रतिशत
लद्दाख----- 16.2---81.2--401 प्रतिशत
हिमाचल प्रदेश--598.4--785.2--31 प्रतिशत
उत्तराखंड--954.6---1088.3--14 प्रतिशत
पंजाब----358.8---440.01---24 प्रतिशत
छत्तीसगढ़--888.6---888.2-औसत पूर्ण
(आंकड़े- 1 जून से 28 अगस्त तक- मिमी में)
इसलिए होती है इतनी बारिश-
जलवायु परिवर्तन: वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण समुद्र की सतह से अधिक वाष्प उठती है। जिसके कारण बारिश तीव्र और असामान्य हो जाती है।
अल नीनो का प्रभाव: प्रशांत महासागर का सतही जल अधिक गर्म हो जाता है और भारत के मानसून को प्रभावित करता है।
निम्न दाब प्रणाली: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में लगातार निम्न दाब के कारण मानसून प्रणाली अधिक सक्रिय हो गई।
जेट स्ट्रीम और पवन पैटर्न: पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं के बीच टकराव के कारण वर्षा की तीव्रता बढ़ गई।
भौगोलिक स्थिति: पहाड़ी और नदी घाटी क्षेत्रों में वर्षा अधिक केंद्रित हो गई।
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